जिसे देख तुमने उठाई
शर्म की दीवार ,
एक लड़की के चरित्र
को बताया दागदार।
ये तो बस एक साधारण सी ब्रा है दोस्त ,
सब पर मत थोपो अपने खोखले संस्कार।।
जिसके नाम से टपकाते हो लार ,
वो तो है नारी का एक श्रृंगार।
ब्रा को इज्ज़त से मत जोडो
ये बस एक वस्त्र है मेरे यार।।
अगर तुम कपड़े के एक टुकड़े को
बताते हो हवस का जिम्मेदार
तो दोस्त तुम दिमाग से हो बीमार।
ब्रा हर महिला पहनती है ,
ऊँचे रखो तुम अपने विचार।
मर्द की बनियान दिखे तो वाह वाह ,
औरत की ब्रा दिखे तो धिक्कार ,
माँ पहनती है , बहन पहनती है
इसे पहनता है पूरा संसार ,
पर कुछ गंवारों ने ब्रा को बना लिया
कीचड़ उछालने का हथियार !
औरत की छाती निहारने वाले होते
हैं बेइज्ज़ती के असली हक़दार ,
तुम खुद भी ब्रा लाकर दे सकते हो
जो करते हो तुम उनसे प्यार !
किसी के पहनावे पर टोकने का
किसी को भी नहीं है अधिकार ,
ब्रा को लेकर ताना मत कसो
ना करो किसी औरत को शर्मसार !
आज किसी की ब्रा को देखकर
तुम करते हो गंदे शब्दों की बौछार ,
कल तुम्हारी बहन बेटी पर उंगली उठेगी
तो तुम्हें कैसा महसूस होगा बरखुरदार ?
अभी से तुम हो जाओ ख़बरदार ,
अपने आपको मौका दो एक बार ,
ब्रा को देखो बस एक कपड़े की तरह
अब तुम ले आओ ख़ुद में सुधार 🙏
- सुशिल म. कुवर
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