''राहें छोटी हों
या लंबी
क्या फ़र्क़ पड़ता है
कि किस मुल्क की
किस सड़क पर
तुम अपनी राह खोते हो..
हज़ारों मुल्क
हज़ारों ज़ुबानें
क्या फ़र्क़ पड़ता है
कि किस मुल्क में
किस भाषा में
साधते हो तुम चुप्पी?''
संकलन : सुशिल म. कुवर
आवर्जून शेअर करू शकता फोटो प्रतिकात्मक आहे
कोणत्याही टिप्पण्या नाहीत:
टिप्पणी पोस्ट करा